माप
यह ब्रेल कितना सही है, और किसके सामने रखकर
पाँच हज़ार सबसे प्रचलित हिन्दी शब्दों में से ४९९७ अक्षरशः मिलते हैं। बाक़ी ३ पर असहमति जान-बूझकर है, और नीचे लिखी है।
मापदंड क्या है
यहाँ हमारा ब्रेल liblouis के सामने रखा जाता है: वह खुला इंजन जिसकी अपनी परियोजना स्क्रीन-रीडर NVDA, Orca, BrailleBack और JAWS को, और ब्रेल बनाने वाले BrailleBlaster को, अपने ऊपर बना बताती है।
ग्रेड १ अक्षर दर अक्षर है — उसमें दूसरी वर्तनी की गुंजाइश नहीं — इसलिए दावा "काफ़ी अच्छा" नहीं, मिलान है। जो न मिले वह या तो दोष है या घोषित असहमति। शब्द hermitdave/FrequencyWords की हिन्दी सूची के — OpenSubtitles के उपशीर्षक, CC BY-SA 4.0 — वे पहले पाँच हज़ार हैं जो केवल देवनागरी से बने हैं।
| क्या | कितने पर | नतीजा |
|---|---|---|
| चलती भाषा के शब्द | ५००० | ४९९७ अक्षरशः |
| अलग-अलग वर्ण, मात्राएँ और चिह्न | १२२ | सब |
| हलन्त वाले शब्द | १२५७ | सब |
| नुक़्ते वाले शब्द | ३१३ | सब |
| संयुक्ताक्षर वाले शब्द | ६४ | सब |
पर मापदंड किस संहिता का?
भारती ब्रेल २.१ ४ जनवरी २०२६ को भारतीय ब्रेल परिषद और राष्ट्रीय दृष्टिदिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (NIEPVD, देहरादून) ने जारी किया। liblouis ने अपनी देवनागरी तालिका २६ फ़रवरी २०२६ को उसके अनुसार बदली।
यह तालिका ३ मार्च २०२६ को liblouis 3.37.0 में जारी हुई, और १ सितम्बर २०२६ को जारी 3.39.0 में भी वही है। पर उससे पुराने संस्करणों — जैसे 3.29.0 — के साथ बँटने वाली तालिका २०१४ की है। जो सॉफ़्टवेयर उन पर टिका है वह चार साल पुरानी नहीं — एक पूरी संहिता पुरानी ब्रेल लिखता है।
इन्हीं पाँच हज़ार शब्दों को दोनों तालिकाओं से चलाने पर २५० शब्द (५.०%) अलग निकलते हैं।
क्या-क्या बदला
| क्या | पहले | अब | क्यों यह मायने रखता है |
|---|---|---|---|
| फ | २०१४ की तालिका फ को बिन्दु २-३-५ देती है। भारती २.१ उसे १-२-४ देता है। यही अकेला परिवर्तन पाँच हज़ार शब्दों में से १५६ को बदल देता है। | ||
| क़ | २०१४ की तालिका नुक़्ते को हटा देती थी, इसलिए क़ और क, ज़ और ज, फ़ और फ ब्रेल में एक ही थे। भारती २.१ नुक़्ते को बिन्दु ५ का अपना ख़ाना देता है। | ||
| ऩ | २०१४ की तालिका में ऩ का ख़ाना अनुस्वार का ही था, ऱ का ड़ का, और ऴ का ल का। तीनों टकराव भारती २.१ ने नुक़्ता चिह्न से दूर किए। | ||
| १ | २०१४ की तालिका देवनागरी अंकों से पहले अंक चिह्न नहीं लगाती थी, इसलिए १ और अ एक ही ख़ाना थे। लैटिन अंकों से पहले वह चिह्न लगाती थी — यानी असंगति भी थी। |
सबसे बड़ा अकेला कारण फ है: अकेले उसी से इन पाँच हज़ार में से १५६ शब्द बदल जाते हैं — फिर, साफ, फ़ोन, तरफ़।
२.१ को कैसे जाँचा गया
प्रकाशित दस्तावेज़ तक इस मशीन से कोई रास्ता नहीं था, इसलिए जाँच का तरीक़ा दूसरा रखा गया — और वह भारती के अपने स्वभाव से निकलता है।
भारती एक ही संहिता है जो कई लिपियों पर चलती है, और liblouis हर लिपि के लिए अलग, हाथ से लिखी तालिका रखता है। यानी वे तालिकाएँ एक ही संहिता के कई स्वतंत्र बयान हैं। देवनागरी को ६ बहन-लिपियों के सामने रखकर, हर यूनिकोड खंड में एक ही जगह के वर्ण मिलाकर देखा गया:
| क्या | कितने वर्ण |
|---|---|
| जहाँ हर तालिका सहमत है | ७६ |
| जहाँ देवनागरी अकेली पड़ती है | १५ |
और इन १५ में से पाँच ठीक वही वर्ण निकले जिन्हें भारती २.१ ने बदला — ऒ, ऴ, ऩ, ऱ और ऋ-वर्ग के स्वर। यानी बहन-लिपियों से मिलान ने वे दोष पहले ही बता दिए, उस सुधरी तालिका के मिलने से पहले जो उन्हें ठीक करती है।
जहाँ यह इंजन चालू तालिका से भी असहमत है
चार जगह। चारों क्रियान्वयन की चूकें हैं, राय का भेद नहीं, और चारों तालिका के अपने स्रोत में देखी जा सकती हैं। हर असहमति दोनों ओर से जाँची जाती है — कि liblouis अब भी वही करता है जो यहाँ लिखा है, और कि यह इंजन दूसरा कुछ करता है। तालिका सुधरी तो जाँच गिरेगी।
तालिका में हर हलन्त-युक्त व्यंजन के लिए हलन्त पहले आता है, और क्ष् के लिए स्पष्ट नियम भी है। ज्ञ् के लिए कोई नियम नहीं, इसलिए वह सामान्य नियम पर गिरता है और हलन्त बाद में छपता है। यह गिनती की चूक है, वर्तनी का नियम नहीं।
| निवेश | liblouis | यह साइट |
|---|---|---|
| ज्ञ् | ⠱⠈ | ⠈⠱ |
क्ष् उसी तालिका में ⠈⠟ निकलता है — हलन्त पहले।
स्रोत: devanagari.cti — क्ष् के लिए नियम है, ज्ञ् के लिए नहीं
तालिका में चार नियम ऐसे हैं जो दो अक्षरों को एक साथ पकड़ते हैं — भ+र, ख+म, ख+क और ख+अल्पविराम — और वे अंग्रेज़ी तालिका के संक्षेपों को रोकने के लिए रखे गए हैं, हिन्दी वर्तनी के लिए नहीं। पर वे पहला अक्षर निगल जाते हैं, इसलिए उसके बाद आने वाला हलन्त सामान्य नियम पर गिरता है और ग़लत ओर छपता है। कर्म और खर्च सही निकलते हैं; भर्ती नहीं।
| निवेश | liblouis | यह साइट |
|---|---|---|
| भर्ती | ⠘⠗⠈⠞⠔ | ⠘⠈⠗⠞⠔ |
कर्म उसी तालिका में ⠅⠈⠗⠍ निकलता है — वहाँ कोई ओवरराइड नियम नहीं है।
स्रोत: devanagari.cti — 'needed to override ® in en-in-g1.ctb table'
यूनिकोड कहता है कि क+हलन्त+नुक़्ता और क+नुक़्ता+हलन्त एक ही पाठ हैं — नुक़्ते का संयोजन-वर्ग ७ है और हलन्त का ९, इसलिए प्रामाणिक क्रम उन्हें स्वयं पुनः क्रमित करता है। liblouis पुनः क्रमित नहीं करता, इसलिए एक क्रम में ज़् बनता है और दूसरे में ज् — अक्षर ही बदल जाता है।
| निवेश | liblouis | यह साइट |
|---|---|---|
| क़्ा | ⠈⠅⠜ | ⠈⠐⠅⠜ |
क़्ा — वही अक्षर, नुक़्ता पहले — उसी तालिका में ⠈⠐⠅⠜ निकलता है।
स्रोत: यूनिकोड मानक अनुलग्नक #१५, प्रामाणिक क्रम
अनुस्वार यदि किसी अन्य अनुनासिक चिह्न के तुरन्त बाद आए तो liblouis उसे लिखता ही नहीं। ँँ और ःः दोनों बच जाते हैं, ंं नहीं। यह वर्तनी का नियम नहीं है; यह वर्ण का लोप है, और छपे हुए ब्रेल में लोप दिखता नहीं।
| निवेश | liblouis | यह साइट |
|---|---|---|
| कंं | ⠅⠰ | ⠅⠰⠰ |
कँँ उसी तालिका में ⠅⠄⠄ निकलता है — वहाँ दोनों बचते हैं।
स्रोत: जाँचा गया: ०९०२ ०९०२ एक ख़ाना देता है, ०९०१ ०९०१ दो।
चलते पाठ में: एक पूरा उपन्यास
शब्द-सूची में न वाक्य के भीतर का विराम-चिह्न होता है, न उद्धरण, न टंकण की चूकें। इसलिए एक पूरी किताब भी बदली गई — प्रेमचंद का «सेवासदन» (१९१९), हिन्दी विकिस्रोत के पन्नों से, ८९०९८ शब्द — इस इंजन से और liblouis 3.39.0 से, और दोनों को शब्द दर शब्द मिलाया गया।
१६१ जगह दोनों अलग हैं, यानी ०.१८१%। ये ग्यारह तरह की हैं, और इनमें से कई पाठ की टंकण-चूकें हैं जिन पर दोनों अलग ढंग से चलते हैं:
- ५५ जगह अल्पविराम के बाद ख़ाली जगह नहीं है (थी,वे)। यह इंजन अल्पविराम, बिन्दु २, लिखता है; संदर्भ बिन्दु ६ लिखता है।
- ३६ जगह विसर्ग की जगह कोलन टंकित है (दु:ख)। यह इंजन कोलन, बिन्दु २ और ५, लिखता है; संदर्भ उससे पहले बिन्दु ४ लगाता है।
- २७ जगह ऐसा वर्ण है जिसे यह इंजन नहीं लिखता और छोड़ा हुआ बताता है: खड़ी रेखा, कोष्ठक, बुलेट, लैटिन अक्षर।
- १८ जगह अनुस्वार या चन्द्रबिन्दु दो बार टंकित है (मेंं)। यह इंजन दोनों लिखता है; संदर्भ एक।
- बाक़ी २५: बिन्दुओं की लड़ी, बेजगह नुक़्ता, शब्द के भीतर पूर्ण विराम, बिना जगह का विस्मयादिबोधक चिह्न, हलन्त के बाद स्वर, वे सात टुकड़े जो शब्द दर शब्द मिलाए नहीं जा सके, और एक शब्द — खम्भे — जिसमें संदर्भ तालिका का ख और म वाला नियम हलन्त को म से पहले नहीं आने देता। यह वही दोष है जो भर्ती में है।
ये १६१ जगहें, हर एक अपने वाक्य और दोनों लिखावटों के साथ, expected-running-text-differences.tsv में हैं, और मापा गया पाठ /data/sevasadan-body.txt है। यह जाँच हर बदलाव से पहले दोबारा चलती है।
जो ख़ाने टकराते हैं
ब्रेल के पास तिरसठ ख़ाने हैं और देवनागरी के पास कहने को उससे ज़्यादा, इसलिए कुछ टकराव अनिवार्य हैं और पढ़ने वाला उन्हें जगह से सुलझाता है। कुछ जगह से भी नहीं सुलझते — और जो संदर्भ-साइट यह न बताए वह अपने पाठक से कहती है कि संहिता जितनी सुथरी है उससे ज़्यादा सुथरी है।
| ख़ाना | क्या-क्या | क्यों |
|---|---|---|
| ऐ, ऍ | भारती २.१ में ऍ के लिए कोई ख़ाना नहीं; तालिका उसे ऐ का ख़ाना देती है। | |
| ऑ, ऒ, ॅ | ऒ द्रविड़ स्वर है और ऍ की मात्रा ॅ भी यही ख़ाना लेती है। | |
| ऋ, ऱ | २.१ ने ऱ को नुक़्ता चिह्न दिया, जिससे वह ऋ के बराबर आ गया। | |
| ण, अंक चिह्न | ण और अंक चिह्न एक ही ख़ाना हैं; तालिका इसे स्वयं स्वीकार करती है। | |
| अंक वाले ख़ाने | १ अ, १ ब, १ फ, १ इ, १ ज | अंक के तुरन्त बाद आने वाला अक्षर अंक से अलग नहीं पहचाना जा सकता, क्योंकि भारती में अक्षर चिह्न नहीं है। १अ और ११ एक ही तीन ख़ाने हैं। |
जो कुछ यहाँ लिखा है, वह जाँचा जा सकता है
ऊपर की हर संख्या किसी फ़ाइल की पंक्तियाँ गिनकर निकली है, याद करके नहीं लिखी गई। मापदंड की मदावली, वर्ण-दर-वर्ण की मदावली और वे २५० पंक्तियाँ जहाँ पुरानी तालिका अलग लिखती है — तीनों यहाँ प्रकाशित हैं — hi-reference.tsv, hi-characters.tsv और hi-2014-differences.tsv — और कोई भी पंक्ति दर पंक्ति देख सकता है कि उसका अपना सॉफ़्टवेयर क्या लिखेगा। २ अक्टूबर २०२६ तक यह पन्ना कहता था कि ये भंडार में हैं, और वे किसी प्रकाशित जगह पर नहीं थीं; शब्द-सूची अपने स्रोत से दोबारा बनाई गई और इस पन्ने का हर शब्द-आँकड़ा उससे दोबारा निकला। वर्ण-दर-वर्ण की पुरानी सूची (२०५ जाँच) नहीं मिली, इसलिए उसकी जगह इस साइट की तालिकाओं का हर वर्ण, मात्रा, चिह्न, अंक और विराम-चिह्न जाँचा गया: १२२, और सब मिलते हैं।
पाँच हज़ार शब्दों में न अंक हैं न विराम-चिह्न, इसलिए यह माप उनके बारे में कुछ नहीं कहता। २ अक्टूबर २०२६ को अंक और विराम-चिह्न संदर्भ में चलाकर देखे गए, और तीन ग़लतियाँ मिलीं जो शब्दों का माप कभी नहीं दिखा सकता था: डैश योजक चिह्न की तरह लिखा जा रहा था, तिरछी रेखा ऐ के ख़ाने से, और ब्रेल से पाठ बनाते समय १.५ जैसा अंक अक्षरों में टूट जाता था। तीनों ठीक कर दी गई हैं।
आगे
अनुवादक
देवनागरी लिखिए और उसे भारती ब्रेल में देखिए, बिन्दुओं समेत।
वर्णमाला
हर स्वर और हर व्यंजन, अपने ख़ाने और अपने पन्ने के साथ।
मात्राएँ
स्वर और उसकी मात्रा एक ही ख़ाना हैं — फिर पढ़ने वाला उन्हें अलग कैसे करता है।
हलन्त और संयुक्ताक्षर
छपाई में हलन्त बाद में आता है, ब्रेल में पहले। यही सबसे बड़ा फ़र्क़ है।
नुक़्ता
क़, ज़, फ़ — और वह बदलाव जो जनवरी २०२६ में आया।
अंक
एक चिह्न, और पहले दस अक्षर अंक बन जाते हैं।