नियम

हलन्त — छपाई में बाद में, ब्रेल में पहले

यही इस संहिता का सबसे बड़ा फ़र्क़ है, और सबसे ज़्यादा काम आने वाला: पाँच हज़ार सबसे प्रचलित शब्दों में से १२५७ में हलन्त है।

देवनागरी में हलन्त (्) उस व्यंजन के नीचे और बाद में लिखा जाता है जिसका स्वर वह हटाता है। "स्" में पहले स आता है, फिर हलन्त।

ब्रेल में उल्टा है। हलन्त का ख़ाना — बिन्दु ४ — उस व्यंजन से पहले लिखा जाता है।

नमस्ते, ख़ाने दर ख़ाने

न, म, फिर बिन्दु ४, फिर स, फिर त, फिर ए की मात्रा। छपाई में हलन्त स के बाद है; ब्रेल में स से पहले।

संयुक्ताक्षर इसी तरह बनते हैं

हिन्दी में जिसे संयुक्ताक्षर कहते हैं वह ज़्यादातर यही है — एक व्यंजन जिसका स्वर हट गया, फिर अगला व्यंजन। ब्रेल में उसे अलग से कुछ नहीं चाहिए: बिन्दु ४, पहला व्यंजन, दूसरा व्यंजन।

हलन्त वाले शब्द और उनके ख़ाने
शब्दब्रेलख़ाने
नमस्ते
हिन्दी
क्या
कर्म
पुस्तक
संस्कृत

इसके दो अपवाद हैं — क्ष और ज्ञ — जिन्हें भारती एक-एक अपना ख़ाना देता है। क्ष और ज्ञ के अपने पन्ने हैं।

यहाँ liblouis ग़लत लिखता है

यह साइट अपने ब्रेल को liblouis के सामने रखकर जाँचती है — वही खुला इंजन जिस पर स्क्रीन-रीडर और ब्रेल प्रिंटर चलते हैं। हलन्त के मामले में उसकी तालिका में तीन जगह चूक है, और तीनों एक ही आकार की हैं।

जहाँ यह इंजन liblouis से अलग है, और क्यों
शब्दliblouisयह साइट
ज्ञ्⠱⠈⠈⠱
भर्ती⠘⠗⠈⠞⠔⠘⠈⠗⠞⠔

कारण बताने लायक़ है। तालिका में चार नियम ऐसे हैं जो दो अक्षरों को एक साथ पकड़ते हैं — भ+र, ख+म, ख+क और ख+अल्पविराम — और इनमें से कोई भी हिन्दी की वर्तनी के लिए नहीं है। वे इसलिए हैं कि जो अंग्रेज़ी तालिका साथ जुड़ी है वह इन जोड़ों को ®, µ और = न बना दे। पर दो अक्षर एक साथ पकड़ने का मतलब है पहला अक्षर निगल जाना, इसलिए दूसरे पर लगा हलन्त सामान्य नियम पर गिरता है और ग़लत ओर छप जाता है।

नतीजा: कर्म ठीक निकलता है, भर्ती नहीं। दोष हलन्त के नियमों में है ही नहीं।

पूरा माप और सारी असहमतियाँ यहाँ हैं।

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