वाक्यांश
हिन्दी ब्रेल में रोज़ के वाक्यांश
८ वाक्यांश, ख़ाने गिने हुए — और हर एक संहिता का कोई एक नियम काम करता हुआ दिखाता है।
ये वाक्यांश केवल अनुवाद के नमूने नहीं हैं। हर एक इसलिए चुना गया है कि उसमें इस संहिता का कोई नियम साफ़ दिखता है — कहीं हलन्त जगह बदलता है, कहीं एक अक्षर दो ख़ाने लेता है, कहीं तीन वर्ण मिलकर एक ख़ाना बनते हैं।
वाक्यांश
| वाक्यांश | ब्रेल | ख़ाने | वर्ण |
|---|---|---|---|
| नमस्ते | ६ | ६ | |
| कृपया | ६ | ५ | |
| क्षमा कीजिए | ८ | १० | |
| हाँ | ३ | ३ | |
| नहीं | ४ | ४ | |
| धन्यवाद | ७ | ७ | |
| ज़रूरी | ६ | ६ | |
| मैं तुमसे प्यार करता हूँ | २० | २० |
दो अन्तिम स्तम्भ अलग-अलग हैं और यही देखने लायक़ है। कृपया में ख़ाने अक्षरों से ज़्यादा हैं, क्षमा कीजिए में कम। इस संहिता में अक्षर गिनकर ख़ाने नहीं निकाले जा सकते। शब्दों के बीच का ख़ाली ख़ाना न ख़ानों में गिना गया है, न वर्णों में।
हर वाक्यांश का नियम
हर वाक्यांश में कौन-सा नियम दिखता है, और ब्रेल का वह टुकड़ा जिसमें वह दिखता है। हर टुकड़ा इस साइट के अनुवादक ने लिखा है।
- नमस्ते — स्त में हलन्त का ख़ाना, बिन्दु ४, स से पहले आता है: । छपाई में हलन्त स के बाद है। यही हलन्त का नियम है, और संयुक्ताक्षर इसी तरह बनते हैं।
- कृपया — ृ की मात्रा दो ख़ाने लेती है — बिन्दु ५, फिर बिन्दु १, २, ३ और ५: । इसलिए ५ वर्णों में ६ ख़ाने हैं (मात्राएँ)।
- क्षमा कीजिए — क्ष छपाई में तीन वर्ण है — क, हलन्त और ष — पर ब्रेल में एक ख़ाना, बिन्दु १, २, ३, ४ और ५: । भारती क्ष और ज्ञ को अपना-अपना ख़ाना देता है, इसलिए यहाँ १० वर्णों में ८ ख़ाने हैं।
- हाँ — चन्द्रबिन्दु, बिन्दु ३, अक्षर और उसकी मात्रा के बाद आता है, जिस क्रम में छपाई में लिखा जाता है: ।
- नहीं — अनुस्वार, बिन्दु ५ और ६, ी की मात्रा के बाद आता है: ।
- धन्यवाद — न्य में वही नियम है जो नमस्ते में: बिन्दु ४, फिर न, फिर य: ।
- ज़रूरी — नुक़्ता, बिन्दु ५, ज से पहले आता है, जबकि छपाई में वह ज के नीचे लगता है: । यह भारती २.१ का नियम है, जो जनवरी २०२६ में आया।
- मैं तुमसे प्यार करता हूँ — ऊपर के तीन नियम एक साथ: मैं में ै की मात्रा के बाद अनुस्वार (), प्यार में प से पहले हलन्त (), और हूँ में ू की मात्रा के बाद चन्द्रबिन्दु ()।
आगे
अनुवादक
देवनागरी लिखिए और उसे भारती ब्रेल में देखिए, बिन्दुओं समेत।
वर्णमाला
हर स्वर और हर व्यंजन, अपने ख़ाने और अपने पन्ने के साथ।
मात्राएँ
स्वर और उसकी मात्रा एक ही ख़ाना हैं — फिर पढ़ने वाला उन्हें अलग कैसे करता है।
हलन्त और संयुक्ताक्षर
छपाई में हलन्त बाद में आता है, ब्रेल में पहले। यही सबसे बड़ा फ़र्क़ है।
नुक़्ता
क़, ज़, फ़ — और वह बदलाव जो जनवरी २०२६ में आया।
अंक
एक चिह्न, और पहले दस अक्षर अंक बन जाते हैं।