स्वर
ब्रेल में ॡ
ॡ का ख़ाना दो ख़ाने हैं — बिन्दु ६, १, २ और ३।
बिन्दु ६, १, २ और ३
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ॡ और उसकी मात्रा
ॡ की मात्रा ॣ है, और ब्रेल में दोनों का ख़ाना एक ही है — बिन्दु ६, १, २ और ३। पढ़ने वाला इन्हें जगह से अलग करता है: व्यंजन के तुरन्त बाद आया यह ख़ाना मात्रा है, और कहीं और आया तो स्वर।
तो "कॣ" इस तरह लिखा जाता है:
और अगर व्यंजन के बाद सचमुच अकेला स्वर ॡ आना हो, तो उससे पहले बिन्दु १ लगता है — यही वह चिह्न है जो कहता है "यह मात्रा नहीं, पूरा स्वर है":
ऌ का दीर्घ रूप
ऌ की तरह यह भी संस्कृत तक सीमित है, और दोनों में अन्तर वही एक बिन्दु का है: ऌ में पहला ख़ाना बिन्दु ५ है, ॡ में बिन्दु ६।
ॡ के बारे में जो नापा जा सकता है
जिन ५,००० सबसे प्रचलित हिन्दी शब्दों पर यह साइट अपने अनुवादक को मापती है, उनमें ॡ एक बार भी नहीं आता। ख़ाना फिर भी दर्ज है, क्योंकि संहिता में वह है।
यह ख़ाना — बिन्दु ६, १, २ और ३ — इस साइट की बाक़ी चार संहिताओं में किसी अक्षर का नहीं है। ॡ की ध्वनि उन लिपियों में है ही नहीं, इसलिए भारती ने इसे तालिका का एक ख़ाली ख़ाना दे दिया।
ॡ का चित्र
ॡ का ख़ाना, किसी पर्ची या स्लाइड के लिए।
