व्यंजन
ब्रेल में ज
ज का ख़ाना एक ख़ाना है — बिन्दु २, ४ और ५।
बिन्दु २, ४ और ५
यूनिकोड ⠚ — U+281A
ज़ के बिना ज़रूरी और जरूरी एक ही शब्द बन जाते हैं
ज़ हिन्दी का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला नुक़्ता वाला अक्षर है — ज़रूरी, ज़्यादा, ज़िन्दगी, मज़ा। इनमें से हर शब्द २०१४ की तालिका में अपने नुक़्ते के बिना छपता था।
ज एक और जगह ग़ायब होता है: ज्ञ छपाई में ज + हलन्त + ञ है, पर ब्रेल में एक ही ख़ाना — बिन्दु १-५-६। तो ज्ञान में ज का यह ख़ाना नहीं आता। ज्ञ का पन्ना यहाँ है।
ज के बारे में जो नापा जा सकता है
जिन ५,००० सबसे प्रचलित हिन्दी शब्दों पर यह साइट अपने अनुवादक को मापती है, उनमें से ४१९ शब्दों में ज आता है।
यही ख़ाना — बिन्दु २, ४ और ५ — अंग्रेज़ी ब्रेल का j, स्पेनिश ब्रेल का j, अरबी ब्रेल का ج भी है।
यह संयोग नहीं है। भारती की व्यंजन-तालिका रोमन लिप्यन्तरण के ढाँचे पर बनी है, इसलिए ज को वही ख़ाना मिला जो अंग्रेज़ी के j का है। ३४ में से १७ व्यंजनों के साथ ठीक यही हुआ है — यानी आधे। जो आधे बचते हैं वे लगभग ठीक वही ध्वनियाँ हैं जिनके लिए रोमन लिपि में अक्षर ही नहीं है: महाप्राण, मूर्धन्य, और अतिरिक्त अनुनासिक।
छपाई में ज और उसका महाप्राण झ एक ही जोड़ी हैं और दिखने में भी मिलते-जुलते हैं। ब्रेल में वह जोड़ी टूट जाती है: ज बिन्दु २, ४ और ५ है और झ बिन्दु ३, ५ और ६ — दोनों में एक भी बिन्दु साझा नहीं। झ का पन्ना
ज उन सात अक्षरों में है जिन पर नुक़्ता लग सकता है। नुक़्ते का अपना ख़ाना है — बिन्दु ५ — और वह अक्षर से पहले लिखा जाता है, बाद में नहीं। नुक़्ते का पूरा नियम यहाँ है।
ज से शब्द
| शब्द | ब्रेल | ख़ाने |
|---|---|---|
| जाना | ४ | |
| जब | २ | |
| जीवन | ४ |
ज का चित्र
ज का ख़ाना, किसी पर्ची या स्लाइड के लिए।
